शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

मेरे अनुभव



कडी - 1

       मेरे एक अभिन्न मित्र है बडे ही वाक चातुर्य । कोई भी बात चाहे सही हो या गलत  वे उसे अपने हिसाब से ही सही या गलत साबित कर देते है । उन्होने यदि ठान लिया कि सही बात को ही गलत साबित करना है तो वे अपने तर्को से सामने वाले को इतना प्रभावित कर लेगे कि उसे ही अपनी सही बात पर भी भ्रम होने लगेगा और वे उनकी बात से सहमत होते दिखेगे । ये उनकी तर्क शक्ति ही है कि वे अपनी बात को इस प्रभावी ढंग से पेश करेगे कि आप सही होते हुए भी असमंजस मे पड जाऐगे कि कहीं मैने गलत तो नहीं देख लिया और आप बैकफुट पर जाते नजर आने लगेगे । आपके मंह से ये निकल ही जाएगा कि हो सकता है मेरे देखने या समझने में कोई भूल रह गंई हो  और  इस प्रकार वे सामने वाले पर अपनी कमान कस लेगे । चूंकि मेरे वे पुराने मित्र रहे है उनके स्वभाव से मै अच्छी तरह वाकिफ हूं इसलिए मुझसे अच्छा कौन समझ सकता है उन्हें ।
      
  ये सौभाग्य समझिये कि एक बार फिर लंबे अंतराल के बाद फिर हम एक साथ हुए । पहले वे भी पत्रकारिता से जुडे थे और मै भी उसी लाईन में था।  उस समय भी उनकी लेखनी इतनी जानदार थी कि वे बडे बडे आई ए एस अधिकारियों को अपने तर्क के आधार पर सोचने पर मजबूर कर देते थे चूंकि पत्रकार थे इसलिए हर कोई अधिकारी पंगा भी लेना नहीं चाहता था। उनकी हां में हां मिलाकर मौन रहने में ही अपनी प्रशासनिक कुशलता समझता थां । कौन ले पत्रकार से पंगा । और वह भी एक तर्क युक्त ऐसे पत्रकार से, जो सही बाते पर भी अपनी तर्क शैली से एक बार तो यह भ्रम पैदा कर ही दे कि वास्तव में ये महाशय जो कह रहे है उसमें सच्चाई हुई तो बिना मतलब के तिल का ताड बन जाएगा ।

       फिर वे भी सरकारी सेवा में आ गए और मै कुछ समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र से जुडा रहा । अन्तोन्गत्वा मुझे भी सरकारी सेवा का अवसर मिल गया और सौभाग्य से हम दोनो अब एक ही विभाग में है । वर्षो तक वर्षो अलग अलग जगह रहकर फिर हम एक जगह मिल गए ।  वर्षो बाद मिलने पर मुझे लगा शायद सरकारी सेवा मे आने के बाद उनके इस तर्कशील दिमाग में कुछ धिसावट आ गई होगी । क्योंकि सरकारी सेवा मे आने के बाद व्यक्ति एक ढर्रे पर चलना सीख जाता है और उसकी तर्कशील क्षमता कम हो जाती है ये एक आम धारणा है लेकिन साहब  उनसे मिलने के बाद मुझे लगा कि उनमें कोई बदलाव नहीं आया है ।

   आज भी वे उसी तरह तर्क करते है और अपने तर्क कौशल से सामने वाले को पटकनी दे ही देते हैं । अब उनकी वही चिर परिचित मुद्रा देखता हूं जब वे अपने किसी तथ्य को सही साबित करने हेतु मस्तिष्क की पैशानियों पर ऐसे बल डालेगे जैसे बहुत ही गंभीर मुद्रा मे हो अव्वल तो उनके चेहरे पर दिखाई देने वाली गंभीरता तो देखकर ही सामने वाला आधा तो अपने दिए तर्क से इधर उधर होने लगता है और उसका मनोबल आधा रह जाता है और फिर जब उनके तर्क को सुनता है तो वह अपने तर्क को ही झुठलाते हुए उनकी बात पर आता दिखाई देता हैं मुझे मन न ही मन उनकी इस मुद्रा पर हंसी आती है और विचार आने लगता है कि अब ये महाशय अपनी बात मनवा कर ही दम लेगे । चाहे इन्हे इसके लिए कितनी ही अन्र्तकथाओं असंबंधित उदाहरणों का सहारा ही क्यों न लेना पडे। आखिर वे अपने तर्क से सहमत कर ही दम लेगे । ये उनकी खासियत है । हा एक बात और अगर वे शुद्ध मन से अपने विचार रखेगें तो उनकी मस्तिष्क की पेशानियां बहुत ही सामान्य रहेगी । अब मैं उनके भावों को देख कर ही समझ लेता हूं कि वे अपनी बात को सिद्ध साबित करने की जिद पर जा रहे है अथवा सामान्य ढंग से ही बोल रहे है ।

       हा इस बार इनकी एक खास बात और देखने को मिली जो शायद उस समय मैं नहीं देख पाया था । इस बार मैने ये अनुभव किया कि उनमें  एक और खासियत है  वे जब भी किसी को अपना शिकार बनाना चाहते है तो वे उससे बहुत ही हिल मिल जाते है इतने कि आपकों ये लगे कि इनसे खास तो कोई सगा भाई भी नहीं हो सकता । छोटी छोटी बात पर आपसे बात करना और नही तो फोन पर ही घंटों बतियाना । मतलब ये कि आपकों ये लगे कि वे आपके सबसे वेलविशर है उनके अलावा और कोई हो ही नही सकता ।यदि वे ऐसा करते है कि उनके कुराफाती दिमाग मे कोई व्यूह रचना रच ली गई और ये सब उसको अंजाम देने का रास्ता है  और जनाब  वे आपको 90 प्रतिशत बाते इतनी सच बोलेगे कि आप उनकी 10 प्रतिशत झूठ को पकड ही नहीं पायेगे । और उस 10 प्रतिशत में ही वे आपको इस कदर फसा देगे कि आप फंसने के बाद भी ये विश्वास ही नहीं कर पाऐगे कि ये सब वो जनाब कर सकते है ।

    इस बार के दो वाकयों ने मुझे उनकी इस खासयित से पहचान करवाई । हा ये और साहब आपके वास्ते दूसरों से शर्त भी लगा लेगे डंके की चोट पर ये कहेगे कि आप चाहे जो कहना वे मेरी बात को नहीं झूठला सकेगे और वास्तव में होता भी ऐसा ही है । क्योंकि मैंने आपको पहले ही बता दिया कि जनाब वाक चातुर्य तो है ही उसके बूते वे अपनी योजना को अंजाम देते है हांलाकि उन दो घटनाओं का यहां जिक्र नहीं करूंगा  लेकिन मुझे महसूस हुआ कि मेरे दोस्त में ये और खासियते है ।
 
       हालाकि उन्हें अपने इस व्यवहार के कारण बहुत कुछ खोना भी पडा है लेकिन वे अपनी इन आदतों से बाज नहीं आते । स्वभावगत जो हो गई है । पहली बार तो उन्हें इतना घनिष्ठ संबंध खोना पडा कि वो संबंध मै आज भी याद करता हूं तो मुझे विश्वास नहीं होता कि ऐसे प्यारे संबंध भी कभी ऐसे स्वभाव की भेंट चढ सकते है क्या? हां उनकी एक खास बात है आपके लिए जी जान दे देगे लेकिन कब आपसे इसकी कीमत मांग ले आप जान ही नहीं पाएगे । और कीमत भी ऐसी कि आप सोच ही नहीं सकते ।

       मेरा तो यह मानना है कि उनकी वाक चातुर्यता संबंध बनाने का कौशल जो है वो तो अनुकरणीय है लेकिन संबंध बना कर उसे ढहाना ये उनकी सबसे बडी कमजोरी है । यही कारण है कि आज उन्हे जिस मुकाम पर होना चाहिए था वे उस के रंच मात्र भी प्राप्त नहीं कर पाए है । मेरी सलाह है मेरे उस प्यारे मित्र को प्लीज कृपया आप इस कमजोरी को दूर कर लीजिए आप सबसे विश्वास पात्र बन सकेगे । आप अपनी एक कमजोरी के कारण कल भी वहीं थे और आज भी वहीं है। क्या आपके भी कोई ऐसा दोस्त है जिसमे आपको कोई खासियत दिखती हो यदि हां तो शेयर कीजिये प्लीज । ताकि ऐसे दोस्तों को अपनी कमजोरियों को दूर करने का एक अवसर तो मिले और उनमें पाजिटिव निखार आ सकें । ऐसी खासियत वाले लोग जीवन में बहुत सफल हो सकते है यदि वे अपनी कुछ कमजोरियों को दूर कर लें । 

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